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अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ

अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ

शरीफ बेवा का बदचलन सफ़र

प्यासी औरत सेक्स मनी कहानी में एक औरत बेवा हो गयी. उसे लंड की जरूरत पड़ी तो वह बेचैन रहने लगी. उसकी सहेली को पता लगा तो उसने लंड का इंतजाम किया. साथ में पैसे भी!

यह कहानी सुनें.

आदाब दोस्तो,
मैं ज़ेबा अत्तार आपका फिर से एक नई कहानी में स्वागत करती हूं.
मेरे बारे में तो आपने मेरी पिछली कहानी
किशनगढ़ की चुदक्कड़ मिंया खलीफा
में पढ़ा होगा।
इसलिए आपका वक़्त बर्बाद न करके में सीधे कहानी पर आती हूँ।

यह कहानी एक विधवा औरत की है जिसका नाम शबनम बानो है।
तो चलिए शबनम की कहानी उसी के मुँह से सुनते हैं।

दोस्तो, मेरी दास्तान पढ़ने से पहले बात दूं कि यह कोई कहानी नहीं है, आप मेरी ज़िंदगी के 3 साल पढ़ने जा रहे हैं.
आप वादा कीजिये कि आप यह दास्तान पूरी पढ़ेंगे।
इस प्यासी औरत सेक्स मनी कहानी में आपको मज़ा भी आयेगा और मेरी बेबसी भी महसूस कर पाओगे।

मेरा नाम शबनम बानो है मगर रिश्तेदार और दोस्त मुझे शन्नो कहकर पुकारते हैं।
मैं कोलकाता के सोनागाछी शहर में रहती हूं।

अभी मेरी उम्र 37 साल है मैं एक विधवा औरत हूँ और मेरी एक कमसिन बेटी है ज़ारा बानो।

मेरा रंग गोरा है और मैं एक गदराये जिस्म की मालकिन हूँ.
मेरे 38 इंच के गदराये मोटे चूचे किसी का भी लंड खड़ा कर सकते हैं.
और मेरी 40 इंच की मदमस्त गांड सलवार में ढकी होने के बावजूद भी लोगों के मुँह से तारीफें बटोर लेती है.
मेरा पेट सपाट है और कमर 32″ की है.
सपाट पेट होने के वजह से मेरे चूचे काफी बड़े दिखाई देते हैं और चलते वक़्त खरबूजों की तरह उछलते रहते है।

मोहल्ले में ऐसा कोई मर्द नहीं है जो मेरी गांड पर हाथ सेकना नहीं चाहता हो।

अब मैं आपको अपनी दास्तान सुनाती हूँ।

बात उन मनहूस दिनों की है जब मेरे शौहर दिल के दौरे से अचानक गुज़र गए।
उनके गुज़रने के 3 महीने बाद मैंने कुछ होश संभाला और वक़्त गुज़ारने के लिए मैं एक प्राइवेट स्कूल में टीचर का काम करने लगी।

वहाँ मेरी उम्र से 4 या 5 साल बड़ी एक और सहकर्मी थी जिसका नाम माया दामोदर था।
सभी उसको माया मैडम कहते थे।

थोड़े ही दिनों में हम अच्छी सहेलियां बन गई।

कुछ दिन और गुज़र गए लेकिन अब धीरे धीरे रात को बिस्तर पर मुझे शौहर की कमी सताने लगी।
मैंने उंगली, तकिया, गाजर सब कुछ इस्तेमाल किया मगर आग बुझने का नाम ही न लेती।
मैं पूरी रात जलते हुए करवटें बदलती रहती।

एक दिन मैं स्कूल में स्टाफ रूम में बैठी थी और मेरे पीरियड्स का दूसरा दिन था।
मैं पसीने पसीने हो रही थी और कसमसा रही थी।

तभी मेरी सहकर्मी ने मेरी परेशानी को भांप लिया और मुझसे पूछा- क्या हुआ शन्नो? बहुत परेशान लग रही हो।
मैंने कहा- नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।

मगर उसने मुझ से कुरेदते हुए पूछा तो मैंने उसको अपनी जिस्मानी ज़रूरत के बारे में बताया क्योंकि कुछ ही दिनों में वह मेरी अच्छी दोस्त बन चुकी थी।

तब माया ने कहा कि वह मेरी हालत अच्छे से समझती है और मुझे रविवार को उसके घर बुलाया यह कहते हुए कि मेरी परेशानी का हल उसके पास है।

3 दिन बाद इतवार को मैं माया मैडम के घर पहुंच गई.
उसने मेरा स्वागत किया, मुझे जलपान कराया और हम बातें करने लगी।

बातों ही बातों में मैंने अपनी परेशानी के बारे में पूछा तो जब उसने मुझे परेशानी का हल बताया तो मैं चौंक गई।
उसने मुझ से कहा कि शहर के कुछ पैसे वाले लोग हैं जिनसे उनकी जान पहचान है और वह उन लोगों का दिल बहलाती है। जिससे उसकी जिस्मानी ज़रूरत और पैसे की कमी दोनों पूरी हो जाती है. वह उन लोगों से मुझे भी मिलवा देगी।

मैंने मन में सोचा यह मुझे सेक्स मनी के बदले अपना जिस्म बेचने को कह रही है।
उस वक़्त मैं उसे कुछ जवाब नहीं दे पाई और बाद में जवाब देने का वादा करके घर लौट आयी।

मैं 4 दिनों तक सोचती रही कि मैं अपना जिस्म नहीं बेचूंगी.
लेकिन निगोड़ी चूत की आग ने मुझे पिघला दिया।

दूसरे दिन मैंने माया मैडम को हाँ बोल दिया और बताया- ये सब करने के लिए मेरे पास कोई जगह नहीं है।
तब माया ने कहा- तू टेंशन मत ले. उन सभी पैसे वाले मर्दों के पास उनकी सुरक्षित जगह है. और अगर तू कहे तो तेरी पहली मीटिंग मेरे घर पे सेट करवा सकती हूँ।
तब मैंने कहा- हाँ, तुम्हारा घर ठीक रहेगा।

तब उसने मेरी कुछ फोटोज उसके मोबाइल में क्लिक करी और कहा- आगे का प्लान मैं तुझे रात को बता दूंगी।

रात को मैं खाना खाकर लेटी हुई मोबाइल चला रही थी.
तब माया का फ़ोन आया, उसने कहा- मैंने तुझे व्हाट्सएप्प पर 5 मर्दों की तस्वीरें भेजी हैं जो रविवार को मेरे घर आने के लिए तैयार हैं और वह तेरे साथ मीटिंग करना चाहते हैं और एक रात के 4000 देने के लिए तैयार हैं. अब तू फोटोज देख कर बता किसके साथ तेरी मीटिंग फिक्स करूँ?
और यह कहकर फ़ोन कट कर दिया।

जब मैंने फोटो देखे तो उनमें सभी मर्द 40 से 45 के रहे होंगे.
पर एक मर्द कुछ कम उम्र का दिख रहा था. शायद 35 – 36 साल का होगा.

मैंने उस आदमी की फ़ोटो को माया को भेजी और कहा- इसके साथ मेरी मीटिंग बुक कर दे!

उसके बाद तुरंत ही माया का ओके लिखा हुआ मैसेज आ गया।

दूसरे दिन मैंने सब जगह की वैक्सिंग की और मीटिंग के लिये तैयारियां करने लगी।

रविवार को शाम को 4 बजे मिलने का समय तय था तो मैं माया के घर 3 बजे ही पहुँच गई।

मुझे देखकर माया ने मेरी चुटकी लेते हुए कहा- उफ्फ, बड़ी जल्दी है चुदने की? एक घंटा पहले ही आ गई!
इस बात पर मैं हंस पड़ी।

जैसे ही 4 बजकर कुछ मिनट गुज़रे थे, एक कार माया के घर आकर रुकी और उसमें से वह मर्द उतर कर आया और मुझे देखकर मुस्कुरा दिया।

उसने माया से कहा- सब कुछ रेडी है?
माया ने कहा- आप ऊपर वाले रूम में जाइये, मैं इसको भेजती हूँ।

वह आदमी ऊपर चला गया.
और माया ने कहा- चल अब तेरे चुदने का टाइम आ गया. ऊपर जा और उसको खुश कर दे. अगर यह खुश हो गया तो तेरी निकल पड़ेगी.

यह कहते हुए उसने मेरे हाथ मे कंडोम का पैकेट दिया और मेरे चूतड़ पर चपत लगाई।

फिर मैं उस कमरे में चली गई।
वह मर्द शर्ट और पैंट उतारकर सिर्फ चड्डी में बेड पर लेटा हुआ सिगरेट पी रहा था।

मैंने अंदर से दरवाजा बंद किया औए चटखनी लगा दी।
उस मर्द ने मुझे अपने पास बुलाया और पास में बैठा लिया।
उसने मुझ से नाम पूछा तो मैंने उसको नाम बताया।

फिर उसने कहा- मेरा नाम विक्रम है।

मैं काफी सहमी हुई थी और हिचकिचा रही थी.
शायद वह भी यह समझ चुका था।
इसलिए उसने मेरी पीठ पर एक हाथ रखा और दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझ से बातें करने लगा।

काफी देर तक बात करने के बाद मैं उसके साथ कम्फ़र्टेबल महसूस करने लगी और हंस हंसकर बातें करने लगी।

बातों ही बातों में मेरी साड़ी का पल्लू कब नीचे गिर गया मुझे पता ही नहीं चला.
जब उसका हाथ मेरी पीठ पर रेंगता हुआ महसूस हुआ, तब पता चला कि ब्लाउज में से झांकते हुए मेरे चूचे उसके सामने थे और वह मेरे चूचों की गोलाइयों को निहार रहा था।

मैंने अपना पल्लू उठाने की कोशिश की तो उसने झट से मुझे अपने ऊपर खेंच लिया और मेरे गाल पर एक चुम्मा जड़ दिया।

तभी मैंने शर्माकर नज़रें चुरा ली तभी उसने मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगा.
होंठ चूसते चूसते उसके हाथ मेरे चूतड़ों पर रेंगने लगे।

मैं उसके होंठों के चुम्मे का पूरी तरह साथ दे रही थी.
तभी उसका एक हाथ मेरे चूतड़ों की दरार का जायज़ा लेने लगा।

कुछ देर बाद उसने मुझे नीचे लिया और मेरे चूचों को मसलने लगा.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर उसने मेरे कपड़े उतारना शुरू किए और चुम्मा चाटी करते हुए हम दोनों पूरे मादरजात नंगे हो गए।

तब उसने मुझे अपना लंड सहलाने का इशारा किया।

उसका लन्ड कड़क होना शुरू हो गया था.
मैं उसके लन्ड को मुट्ठी में भर कर ऊपर नीचे हिलाने लगी।

अब तक मैं उसके साथ पूरी तरह से खुल चुकी थी तो मुझे किसी भी बात से कोई परहेज नहीं था।

कुछ देर उसका लन्ड हिलाने के बाद में नीचे झुकी और उसके लन्ड को चूसने लगी क्योंकि मुझे लन्ड चूसना बहुत पसंद है.
उसके लन्ड से मादक खुशबू आ रही थी जिससे मुझे और भी ज़्यादा नशा चढ़ने लगा था।

मैं लन्ड चूसने में उस्ताद हूँ इसलिए विक्रम के मुँह से आह आह की सिसकारियाँ निकलने लगी।
मेरी लन्ड चुसाई से उसका लन्ड पूरी तरह कड़क होकर अकड़ गया था।

फिर मैंने कंडोम का पैकेट खोलकर एक कंडोम उसके लन्ड पे चढ़ा दिया और जांघें खोलकर लेट गई।

तभी विक्रम मेरे ऊपर आया और मेरी चूत पे लन्ड सेट कर दिया।

मैं भी बहुत प्यासी थी इसलिए मैं भी चाहती थी कि वह मेरी प्यासी चूत में लन्ड डालकर मेरी चुदाई जल्दी से कर दे।

फिर क्या था … विक्रम ने ज़रा सा दम लगाया और विक्रम का पूरा लन्ड मेरी चूत की गहराई में समा गया।

अब विक्रम मेरे चूचे चूसते हुए मेरी चूत की खुदाई कर रहा था और मैं आसमानों में उड़ रही थी।

आधा घंटा चुदाई के बाद वह रुक गया.
हम दोनों पसीने में भीग गए थे और विक्रम ने मेरे चूचे चूस चूस कर और मसल मसल कर लाल कर दिए थे।

उसके बाद विक्रम नीचे लेट गया और मुझे लन्ड की सवारी करने का इशारा किया।

मैं झट से विक्रम के ऊपर बैठी और लन्ड को चूत पे सेट किया और गांड का पूरा वज़न लन्ड पे छोड़ दिया.
मेरी मोटी गांड जैसे ही नीचे गिरी, छप करके आवाज़ आयी.

इस बार लन्ड के सुपारे ने मेरी बच्चेदानी तक पहुँचकर उसपे चुम्मा ले लिया।

अब मैं अपनी गांड लन्ड पे पटक रही थी और विक्रम मेरे चूचे मसल रहा था.

इसी बीच मेरा पानी निकल गया और उस पानी से मेरी जांघें भीग गई.

फिर भी मेरी प्यास खत्म नहीं हुई और मैं अपनी चिकनी चूत के होंठों से विक्रम के झाँटों के बालों को रगड़ रही थी.

कुछ देर बाद विक्रम का भी वीर्य निकल गया और वह झड़ गया।

थोड़ी देर बाद वह उठा फिर उसने मेरी चूत से निकले सफेद पानी को अमृत समझकर मेरी पूरी चुत चाट चाट कर साफ कर दी।

जब वह उठा, तब मैंने उसका कंडोम उतारा और फिर से उसका लंड चूसने लगी।

कुछ ही देर में उसका लण्ड फिर फौलादी हो गया और उसने कंडोम चढ़ाने को कहा.

मैंने झट से लन्ड पर कंडोम चढ़ाया और गांड ऊँची करके कुतिया बन गई.
तब विक्रम पीछे आया और मेरे चूतड़ों पर दो करारे थप्पड़ रसीद किये और फिर लन्ड चूत में पेल दिया और मुझे किसी कुतिया की तरह चोदने लगा।

इसी तरह अलग अलग आसनों में उसने मेरी 5 घंटे चुदाई की।

उन पांच घंटों के दौरान में 6 बार झड़ी और विक्रम 4 बार झड़ा।
उसने चुदाई में 2 कंडोम भी फाड़ दिए।

रात के 9 बज चुके थे और हम दोनों पूरे नंगे एक दूसरे से चिपक कर लेटे हुए थे।

फिर हम उठे और कपड़े पहन लिए।

उसके बाद उसने पैसे निकाले, मुझे अपनी बांहों में लिया, मेरे होंठों को चूसते हुए उसने एक हाथ मेरी ब्रा में घुसेड़ कर मेरा चूचा मसला और सेक्स मनी ब्रा में ही छोड़ते हुए कहा- मैं तुझे जल्द ही वापस बुलाऊँगा. तूने मुझे खुश कर दिया।
यह कहकर वह चला गया।

उसके बाद में नीचे आ गई और माया से लिपट गई।
माया समझ गई थी कि मैं खुश हूं।

तब माया ने कहा- आज से तेरा भी रंडियों की दुनिया में स्वागत है।

उसके बाद तो जैसे मेरे पंख लग गए और में कुछ ही महीनों में शहर के रईसों की पसंदीदा छिनाल रण्डी बन गई।
और मैंने अपना खुद का एक रंडीखाना भी खोल दिया जिसमें मैंने बहुत सी लड़कियों को काम दिया।

अब कैसे मेंने ये सब किया, वह में आपको अगली कहानी में बताऊँगी.
तब तक के लिए मेरी चुत की गहराइयों से नमस्कार।

तो दोस्तो, कैसी लगी आपको शबनम की आप बीती?
प्यासी औरत सेक्स मनी कहानी ओअर कमेंट करके बताना।
अगली स्टोरी बहुत जल्द लेकर आऊँगी।

8 thoughts on “शरीफ बेवा का बदचलन सफ़र”

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