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अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ

अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ

चुदक्कड़ परिवार में इकलौते मर्द से सारी चूतें चुदीं

बैड Xxx डर्टी स्टोरी एकदम मनघड़ंत है. जब किसी गंदे दिमाग में कुत्सित विचार आते हैं तो ऐसी कहानियाँ जन्म लेती हैं. आप भी इस बुरी कहानी का मजा लीजिये.

दोस्तो, मेरा नाम अवी है. मेरी उम्र 29 साल है.
मैं अब पेरिस में शिफ्ट हो गया हूँ.

यह बैड Xxx डर्टी स्टोरी 7 साल पहले की है.
उस समय मैं अपने मम्मी पापा के साथ मुंबई में रहता था.

मेरे मम्मी पापा की लव मैरेज हुई थी.

एक बार की बात है, मेरे मम्मी पापा उस दिन बहुत खुश लग रहे थे.
मेरे पूछने पर बोले- तुझे आकर बताएंगे, तेरे लिए एक सरप्राइज है.

अगले महीने मेरा जन्मदिन भी था, तो मुझे लगा कोई पार्टी प्लान कर रहे होंगे.
फिर वे चले गए.

शाम को मेरे पास एक फोन आया.
मैं हॉस्पिटल पहुँचा तो पता चला कि एक रेस्टोरेंट में एक बेकाबू ट्रक घुस गया था, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गयी थी.
उस दुर्घटना में मेरे मम्मी पापा भी थे.

उस हादसे से मैं टूट सा गया क्योंकि मेरा, मम्मी पापा के अलावा दुनिया में कोई नहीं था.

पर कहते हैं न जिंदगी कभी नहीं रूकती … मैंने पापा का एक्सपोर्ट का बिजनेस संभाल लिया और अकेला ही जीने लगा.

एक दिन मुझे एक कॉल आया कि वे मेरे दादा हैं और आखिरी बार वे मुझसे मिलना चाहते हैं.
यह सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरा भी कोई अपना है.

अगले दिन मैं अपने दादा मिलने मध्य प्रदेश के एक गाँव के लिए निकल गया.
यहां से मेरी जिंदगी ने नया मोड़ लिया और चुदाई का नया खेल शुरू हो गया.

उस घर में टोटल 6 लोग थे.

दादा जी बेड पर अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे.
उधर मेरी बुआ जी भी थीं.

वे मुझसे 10 साल बड़ी थीं मगर क्या गजब की कयामत थीं.
उनका 36-30-38 का मदमस्त कर देने वाला फिगर था. उन्होंने एक नाइटी पहनी हुई थी.
उस नाइटी का गला काफी गहरा था, जिस वजह से उनके आधे से ज्यादा चूचे मुझे साफ दिख रहे थे.
बुआ का नाम रज्जो था.

बुआ के बगल में मेरी उम्र की ही छोटी चाची खड़ी थी.
उसका नाम अंजु था और उसकी उम्र 22 साल थी. अभी 6 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी और शादी के दो दिन बाद ही छोटे चाचा गुजर गए थे.
भरी जवानी में चाची विधवा हो गयी थी.
वह बुआ को खूबसूरती में बराबर की टक्कर दे रही थी.
उसका 34-28-36 का फिगर गजब ढहा रहा था.

वह साड़ी पहनी हुई थी.
उसका ब्लाउज ब्लाउज कम ब्रा ज्यादा दिख रहा था जिसमें से उसकी दोनों चूचियां बाहर आने को तड़प रही थीं.

सामने बड़े ताऊ की दोनों बेटिया खड़ी थीं. बड़ी ज्योति 32-26-34 की और छोटी निशा 30-24-32 की फिगर वाली थी.
वे दोनों भी कच्ची अमिया के जैसी करारी माल दिख रही थीं.
दोनों ने मिनी स्कर्ट और क्रॉप टॉप पहना था.

तभी मेरी नजर बाथरूम से निकलती भाभी (मालती) पर पड़ी, जो सिर्फ ब्रा और साया में थी. वह भी हुस्न की मलिका थी.

उसका 34-28-36 का कटावदार बदन का एक एक अंग खूबसूरत था, मेरी तो उस पर से नजर ही नहीं हट रही थी.

मैं उसकी चूचियों को घूरे जा रहा था कि अचानक उसकी नजर मुझ पर पड़ गई.
उसने सबसे नजर बचा कर अपनी ब्रा को नीचे खींच दिया और अपनी दोनों चूचियां बाहर निकाल कर मुझे दिखा दीं.

उसकी इस निर्लज्जता से मैं शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगा.

दादा जी ने कहा- ये सब की सब रांड बन गयी हैं, दिन भर सब नंगी ही रहती हैं. आज तुम आ रहे थे तो थोड़े कपड़े पहनी हैं.

उनके मुँह से अपनी तारीफ सुनकर सब हंसने लगीं.

फिर दादा जी ने बताया कि मेरी मम्मी पापा के साथ उस दुर्घटना में मेरे दोनों चाचा, एक चाची, भाई और फूफा की भी मौत हो गयी थी.
सब मेरे पापा से मिलने गए थे.

अब इस घर में मर्द के नाम पर दादा ही थे, जिनकी सारी जिमेदारी अब मुझे संभालनी थी.
दादा जी बोले- मेरी करोड़ों की जायदाद अब सब तेरी है. बस तुझे अब इन सारी महिलाओं का ख्याल रखना है.

मैं चुप था और समझने की कोशिश कर रहा था कि यह सजा सुनाई जा रही है या मजा दिया जा रहा है.

दादा जी आगे बोले- तुम अपनी भाभी से शादी कर लो और सबको अपने साथ रख लो, बहनों की शादी करवा देना और बाकी तीनों को अपने साथ रखना चाहो, तो तुम तीनों को चोद भी सकते हो!
मेरे मुँह से निकल गया- पांचों को अपनी रांड बना लूँ तो?

दादा से पहले बहनें बोल दीं- यह बहुत ही अच्छा आईडिया है.

मैं भी खुश हो गया और मैंने कहा- फिर तो निशा (सबसे छोटी) से आज शुरूआत कर देता हूँ!
निशा बोली- जब करना ही है तो सबके सामने ही शुरू करते हैं. सबको ये पता भी चल जाएगा कि आप में कितना दम है. आप सब को खुश रख भी पाओगे या नहीं!
मैं भी तैयार हो गया.

मैं उठ कर सीधा जाकर निशा के होंठों पर किस करने लगा और उसकी चूचियां दबाने लगा.

कुछ मिनट किस करने के बाद मैं उसे नंगी करने के लिए मुड़ा तो देखा सारी औरतें नंगी हो चुकी थीं और एक दूसरी के साथ लेस्बियन सेक्स कर रही थीं.

यह देख कर मैं और जोश में आ गया और निशा के कपड़े फाड़ कर उसे नंगी कर दिया.

अब मैंने उसे बैठाया और अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया.

वह बड़े मजे से लंड चूसने लगी.
उसे अपना लंड चुसवाते हुए ही मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और पूरा नंगा हो गया.

सब महिलाएं मेरे लंड को और शारीरिक बनावट को देखने लगी थीं.
भाभी तो करीब आकर मेरे सीने पर हाथ फेरने लगी थी.
मैं भी उसे होंठों पर चूमने लगा.

कुछ मिनट लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा, साथ ही साथ उसकी चूचियां दबाने लगा.
वह भी मजे ले लेकर अपनी बुर चुसवा रही थी और आह आह की कामुक आवाजें निकाल रही थी.

सच में क्या मस्त बुर थी उसकी … एकदम सील पैक.
अब मैंने उसे चुदाई की पोजीशन में लिटा दिया और उसकी बुर पर लंड रगड़ने लगा.

वह सिसियाती हुई बोलने लगी- आह भईया … प्लीज और मत तड़पाओ … जल्दी से घुसा दो अपना लंड!
मैं बोला- भईया नहीं सैयां बोल छमिया.

वह बोली- हाँ प्लीज मेरे सैयां, चोद दो अपनी रांड को … और बना लो अपनी रखैल!
मैंने उसकी चूत पर थूक लगाया और जोर का झटका दे मारा.

सुपारा चूत को फैलाता हुआ अन्दर पेवस्त हो गया और वह चिल्लाने लगी- अरे बाप रे … फाड़ दी मेरी बुर इसने … आह निकाल ले!
मैं बोला- अभी कहां फाड़ी है मेरी रांड … अभी तो सिर्फ दो इंच ही अन्दर गया है. अभी तो पूरा 6 इंच बाकी है.

यह कह कर मैंने 3-4 जोर जोर के झटके मारे और अपना पूरा लंड उसकी बुर में घुसा दिया.
वह बेहोश होने लगी, उसकी आंखों से आँसू की धार गिरने लगी और बुर से खून की लकीर निकल पड़ी.

थोड़ी देर तक मैं वैसे ही रुका रहा और उसके होंठों को चूसता रहा, साथ में चूचियों को सहलाता और मसलता रहा.

यह सब देख भाभी जोर से बोली- वाह देवर जी, क्या सील तोड़ी है साली की … मजा आ गया देख कर … काश मैं भी सील पैक होती, तो मुझे भी ये दर्द मिलता!

मैंने कहा- कोई बात नहीं भाभी, अभी ज्योति की सील भी टूटेगी, उसे भी एन्जॉय करना … और तेरी चुदाई तो और बेरहमी से करूँगा!

उस पर भाभी बोली- एक नहीं दो सील और टूटेंगी … तेरी चाची की भी सील अभी तक नहीं टूटी है!
यह सुन कर मैं और खुश हो गया.

इधर निशा को अब अच्छा लगने लगा था, तो वह अपनी कमर हिलाने लगी थी.

मैंने भी धक्के लगाना शुरू कर दिया.
अब वह हर धक्के के साथ कामुक आवाजें भी निकाल रही थी- आह ऊह ओह चोदो मेरे सैयां … आज इस रांड को अपनी रखैल बना लो … जोर जोर से चोदो मेरे सैयां … उम यस आह ओह उह ईश्!

‘हां मेरी रांड, आज तेरी चूत फाड़ कर इसका भोसड़ा बना दूंगा ताकि तू कभी भी किसी का भी लंड आराम से ले सके. अभी तो तेरी गांड का छेद भी बड़ा करना है मुझे … आखिर दादा जी ने मुझे कुछ जिम्मेदारी दी है!’

दस मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद मैं नीचे लेट गया, निशा मेरे ऊपर आकर लंड पर बैठ गई और उछलने लगी.
भाभी और चाची आकर उसकी एक एक चूची को पकड़ कर मसलने लगीं.

कुछ मिनट तक लंड पर उछलने के बाद मैंने उसे घोड़ी बना लिया और पीछे से चोदने लगा.
आधा घंटा की चुदाई में वह 3 बार झड़ चुकी थी.

अब मैंने भाभी से तेल मंगवाया और उसकी गांड में तेल डाल कर उंगली से अन्दर तक लगा दिया.
फिर मैंने अपने लंड को तेल से नहला दिया.

भाभी और चाची ने निशा को आगे से पकड़ा और मैंने उसकी गांड पर लंड सैट करके जोरदार झटका दे मारा.

मेरा आधा लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया.
वह चिल्लाने लगी- आह छोड़ दो मुझे … प्लीज मेरी गांड फट जाएगी … प्लीज छोड़ दो मुझे!

पर मैंने उसकी एक ना सुनी और दूसरे झटके में पूरा लंड गांड में उतार दिया.

अब मैं धीरे धीरे उसकी गांड मारने लगा.
भाभी और बुआ ये देख कर बहुत खुश हो रही थीं.

वहीं चाची और ज्योति की गांड फट रही थी कि उनके साथ भी यही होगा!

थोड़ी देर बाद निशा सामान्य हुई तो मजे ले लेकर गांड मरवाने लगी.
बीस मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद मैंने लंड निकाला और कपड़े से पौंछ कर उसके मुँह में दे दिया और अपना सारा माल उसके मुँह में डाल दिया.

वह सारा वीर्य बहुत आराम से पी गयी.
अब मैं उससे अलग होकर वहीं लेट गया.

चुदाई देख कर सभी खुश थे.

चाची और ज्योति थोड़ी डरी हुई थीं, पर दादा बहुत खुश दिख रहे थे.

मैं बोला- निशा को छोड़ कर सब अपने कपड़े पहन लो ताकि चुदाई से पहले मैं तुम्हारे कपड़े फाड़ कर तुम्हें नंगी कर सकूँ.
सबने अपने कपड़े पहने और सबने मिल कर खाना बनाया. निशा बस नंगी ही रह कर सारे काम कर रही थी.

चुदाई के बाद हम सब खाना खाने बैठे, जिसमें मैं और निशा बिल्कुल नंगे बैठे थे और बाकी औरतें कपड़े पहन कर मजा ले रही थीं.
भाभी हम सबको खाना परोस रही थी. खाना परोसने के बाद वह एक तरफ खड़ी हो गई.

मैंने कहा- भाभी आप भी खा लो.
वह बोली- सैयां जी, पहली बात तो ये कि मुझे भाभी ना बोल कर, मालती बोलो या फिर अपनी रांड या रखैल कह कर बुलाओ.

इस पर बुआ बोली- हां … आज से तुम हम सबको नाम से या रांड कह कर बुलाओगे.

‘ठीक है मेरी रंडियो, आओ खाना खा लो!’
मालती रांड बोली- मैं ये नहीं स्पेशल खाना खाऊंगी.

वह आकर टेबल के नीचे घुस गयी और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने चाटने लगी.
ये देख कर ज्योति बोली- ये गलत बात है, भाभी अभी मेरी बारी थी.

इस पर मैं बोला- अरे रुको, मैं बताता हूँ. एक सील तोड़ी हुई और खुली चूत चोदूंगा, फिर सील पैक को चोदूंगा. उसके बाद फिर से खुली चूत और बंद बुर. उस हिसाब से अभी मालती रांड और ज्योति … फिर रज्जो और अंजु रांड … बताओ सही है!
सबने हामी भरी और मालती रांड वापस लंड चूसने लगी.

मैं मजे ले लेकर खाने लगा.
खाना खा कर मैंने मालती को उठा कर उसके सारे कपड़े फाड़ कर उसे वहीं डायनिंग टेबल पर लिटा दिया और उसकी चूत में दो उंगली डालने कर आगे पीछे करने लगा; साथ में उसकी चूचियां मसलने लगा.

वह आह ओह की आवाज़ निकालने लगी.
थोड़ी देर उंगली करने के बाद मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया, जिससे वह और पागल हो गयी.

कुछ मिनट चूत चाटने के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सैट किया और निशा से कहा- तुम्हारी चुदाई में इसने बहुत मजे लिए थे, अब तुम इसकी चीखें सुन कर मजे लो.
इस पर मालती भाभी बोली- मैं तो लेटी ही हूँ चीखने के लिए, तुम्हारा लंड देख कर ही पता चल गया था कि तुम हम सब की चीखें निकालोगे. अब जल्दी से फाड़ दो मेरी चूत को!

यह सुन कर मैंने एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा पूरा लंड एक बार में उसकी चूत फाड़ता हुआ अन्दर घुसता चला गया.
वह जोर जोर से चिल्लाने लगी- आह मर गई रे … कितना जलिम इंसान है ये … साला जरा सा भी रहम नहीं करता … आह इसने मेरी फटी चूत को आज दुबारा से फाड़ दिया.

यह सुन कर निशा खुशी से उछल पड़ी और बोली- क्यूँ भाभी, अब मजा आ रहा है न … लंड की ताकत को झेलो.
मैंने वापस से अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और एक जोरदार झटके से वापस पूरा लंड पेल दिया.

मैंने ऐसे 8-10 झटके मारे.
हर बार वह चीख रही थी.

फिर मैं उसे राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड में चोदने लगा.

बीस मिनट तक मैंने उसे ऐसे ही चोदा, फिर घोड़ी बनने को बोला.
वह झट से घोड़ी बन गयी, मैंने बिना उसे बताए लंड उसकी गांड में डाल दिया.

वह पुनः चिल्लाने लगी और बोली- आह … मैंने अब तक सिर्फ दो बार ही अपने भाई से गांड मरवाई थी … उसके बाद कई सालों से मेरी गांड कोरी पड़ी थी. थोड़ा धीरे मारो.
यह सुन कर हम सब एक दूसरे को देखने लगे.

मैंने बोला- मतलब तू अपने भाई से चुद चुकी है?
वह बोली- हां पर वह सब मैं बाद में बताऊंगी. अभी मेरी गांड फाड़ो.

मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में अपना पूरा लंड घुसाया और गांड मारने लगा.
बुआ भाभी को गाली देने लगी- कितनी मादरचोद है ये … इसको मैंने इस घर के सारे लंड दिलवाए … अपने सारे चूत का आशिक से चुदवाया … और यह रंडी आज तक मुझसे इस बात को छुपा कर रखे रही थी. जानू आज तुम इसकी गांड तोड़ दो.

यह कह कर बुआ मेरे पास आयी और उसने भाभी की गांड पर जोरदार तमाचा मार दिया.
भाभी चिल्लायी- आह मर गई … आह साली रंडी. चूत का आशिक

मैं भी इसी तरह कभी मालती भाभी की गांड तो कभी चूत मारने लगा.
काफी देर तक चोदने के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में ही गिरा दिया.

बुआ तुरंत करीब आ गई और उसकी चूत से मेरे बाहर आते माल को चाटने लगी.
उसने सारा रस साफ करने के बाद मेरा लंड मुँह में भर लिया और चाट चाट कर साफ कर दिया.

इतना सब होने के बाद दादा जी ने आवाज लगाई.
वे सामने बेड पर लेटे थे.

उन्होंने हम सभी को बुलाया और बोले- सब लोग जाकर कपड़े पहनकर आओ, वकील साहब आ रहे हैं.

सबने जाकर कपड़े पहन लिए और अच्छे से तैयार हो गए.
हम सब दादा जी के पास बैठ गए.

थोड़ी देर बाद वकील साहब आ गए.
दादा ने उनसे सब कुछ मेरे नाम करने के डाक्यूमेंट्स बनवाए और साइन करके सब कुछ मेरे नाम कर दिया.

इस सब कामों में 2 घंटे बीत गए थे.
वकील साहब बोले कि 3 दिन में सब कुछ ट्रांसफर हो जाएगा.

वे चले गए.

इसके आगे मैंने किसे कैसे चोदा, ये सब इस काल्पनिक सेक्स कहानी के अगले भाग में बताऊंगा.
आशा करता हूँ कि आप लोगों को ये बैड Xxx डर्टी स्टोरी पसन्द आई होगी. अपना प्यार अवश्य दें.

20 thoughts on “चुदक्कड़ परिवार में इकलौते मर्द से सारी चूतें चुदीं”

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